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Friday, January 24, 2025

"मैंने देखा है उसे"

 




मैंने देखा उसे आज फ़िर,

कुछ गुम सा खोया हुआ,

बेचैन सा शायद,

मैंने उसे आज फ़िर देखा है लड़ते हुए, जूझते हुए खुद से,

वो आज बिल्कुल भी वो नहीं था जो कभी हुआ करता था,

उमंगों से लबरेज़, हंसो सा चंचल।


आज वो उलझा हुआ सा है कुछ ख्यालों में,

मानों खुद से कुछ पूछ रहा हो,

ख़ुद को ढूँढ रहा हो ख़ुद में,

उसके चेहरे से साफ़ नज़र आता है कि,

वो आज बिल्कुल भी वो नहीं रहा जो कभी हुआ करता था ।


****

तुम किसी से मिलना तो

किसी से मिलो तो ऐसे मिलना की जैसे पहली बार नहीं तीसरी – चौथी बार मिल रहे हो, ऐसे मिलना की उसे लगे कि हम क्या सच में पहली बार ही मिल रहे हैं!...