खुद की खोज : बाह्या जगत से अंतर्जगत की यात्रा हम क्या है? क्यों हैं? ऐसे तमाम प्रश्नों पर कुछ शब्द! स्वागत है आपका विचारों की दुनिया में..
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Friday, January 9, 2026
तुम किसी से मिलना तो
किसी से मिलो तो ऐसे मिलना की जैसे पहली बार नहीं तीसरी – चौथी बार मिल रहे हो,
ऐसे मिलना की उसे लगे कि हम क्या सच में पहली बार ही मिल रहे हैं!
तुम्हारा किसी से मिलना महज़ मिलना हो सकता है पर किसी के लिए वह ताउम्र भर ठहर जाने वाली खुशी हो सकती है,
किसी से मिलना तो इतनी ताज़गी, गर्मजोशी से मिलना कि, तुम्हारा मिलना, मिलना भर न रह जाए
किसी से मिलना तो पीछे का सब पीछे छोड़कर मिलना ताकि नए का स्वागत कर सको,
तुम किसी से मिलना तो ऐसे मिलना की उम्र भर साथ रह जाओ, कुछ यादों में, कुछ बातों में तो कुछ मुलाक़ातों में।
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Saturday, October 4, 2025
"तुम्हारें जाने के बाद"
मैं जानता हूं तुम एक दिन चले जाओगे
बहुत दूर
कितना दूर नहीं जानता
शायद इतना कि मैं जान सकूँ
तुम्हारा जाना क्या होता है
शायद इतना मैं जान पाऊँ
तुम्हारा होना क्या होता है।
और आज जब तुम चले गए हो
मुझे ठीक - ठीक एहसास हो गया है कि तुम चले गए हो
आज तुम्हारें कपड़े, जूते, और किताबें सब व्यवस्थित हैं
हो भी क्यों ना
उन्हें भी पता है तुम चले गए हो।
नीम की शाखाओं से तुम्हारा झूला टंगा है
कुछ चिड़ियों का झुंड मंडरा रहा है
झूले के पास
पर सब में आज एकमत से चुप्पी है
कोई चहचहाहट नहीं है
चावल के दाने तो आज भी बिखरे हैं वहां
पर शायद चिडियों का आज उपवास है
या झूले का , पता नहीं
शायद वो जान गए हैं
तुम्हारा जाना क्या होता है
और शायद मैं भी।
और अब मैं जान गया हूँ
तुम्हारें जाने के बाद क्या होता है।
🖋️शिवेन्द्र
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Wednesday, February 26, 2025
अंतर्द्वंद
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Thursday, January 30, 2025
"सफ़र"
जब चलते – चलते
मार्ग के अंत की चिंता ख़त्म हो जाए,
जब किसी गंतव्य तक पहुंचने की बेचैनी न रहे,
जब कहीं पहुंचना है इसलिए न चलना पड़े
बल्कि चलने में ही आनंद आने लगे,
तब समझ लेना आप सिर्फ़ चल नहीं रहे हैं
बल्कि जी रहे हैं अपने सफ़र को, अपनी मंजिल को,
और तब आप पाएंगे कि सफ़र और गंतव्य में
कोई अन्तर शेष नहीं रहा।
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Tuesday, January 28, 2025
"इंतज़ार"
“किसी चीज का इंतज़ार
वास्तव में हमारे सहनशीलता की परीक्षा है,
क्योंकि उन क्षणों में हम क्षण – क्षण
मानसिक तौर पर घुल रहे होते हैं।”
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Sunday, January 26, 2025
"तुम मुझे कभी नहीं जान पाओगे"
तुम मुझे कभी नहीं जान पाओगे,
क्योंकि उसके लिए तुम्हें मेरे करीब आना होगा,
और ऐसा कभी नहीं होगा,
क्योंकि मुझे दूर जाने का रोग है!
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