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Tuesday, April 15, 2025

कभी - कभी किसी चीज की खोज में


कभी - कभी हम किसी चीज की खोज में इतना दूर निकल 

आते हैं कि हम खुद को खो देते हैं,

और तब हमें महसूस होता है कि हम वास्तव में बहुत

दूर निकल आए हैं! 

Thursday, March 6, 2025

"मैं कभी हाँ नहीं कह पाया"



" सवालों – जवाबों का सिलसिला भी अजीब था,

उसने कभी मना नहीं किया

और मैं कभी हाँ नहीं कह पाया।" 


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Thursday, January 30, 2025

"सफ़र"





 जब चलते – चलते

मार्ग के अंत की चिंता ख़त्म हो जाए,

जब किसी गंतव्य तक पहुंचने की बेचैनी न रहे,

जब कहीं पहुंचना है इसलिए न चलना पड़े

बल्कि चलने में ही आनंद आने लगे,

तब समझ लेना आप सिर्फ़ चल नहीं रहे हैं

बल्कि जी रहे हैं अपने सफ़र को, अपनी मंजिल को,

और तब आप पाएंगे कि सफ़र और गंतव्य में

कोई अन्तर शेष नहीं रहा।


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Sunday, January 26, 2025

"तुम मुझे कभी नहीं जान पाओगे"



 

तुम मुझे कभी नहीं जान पाओगे,

क्योंकि उसके लिए तुम्हें मेरे करीब आना होगा,

और ऐसा कभी नहीं होगा,

क्योंकि मुझे दूर जाने का रोग है!



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Saturday, January 25, 2025

"वो बैठा है"



 निर्जन वन में,

किसी पेड़ की छाव में,

बैठा है वो, नितांत अकेला ।

उसके चेहरे पर मंद सी मुस्कान है,

उस मुस्कान में एक सुकून सा है,

अजीब सी मनमोहकता है,

वह बिन वज़ह खींचती है अपनी ओर,

मैं खींचा चला जा रहा हूँ उस सुकून में ,

उस सुकून से उपजे एकान्त में ।

वो बैठा है निर्जन वन में किसी दरख़्त की छाव में,

एकदम अकेला अपने एकान्त में ।

***

दरख़्त– पेड़

Friday, January 24, 2025

सुख

चुप रहना, शांत बैठना,


इस चिंता से मुक्त होकर


कि हम कुछ सोच रहे हैं


यह भी एक सुख है!


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तुम किसी से मिलना तो

किसी से मिलो तो ऐसे मिलना की जैसे पहली बार नहीं तीसरी – चौथी बार मिल रहे हो, ऐसे मिलना की उसे लगे कि हम क्या सच में पहली बार ही मिल रहे हैं!...