Thursday, January 30, 2025

"सफ़र"





 जब चलते – चलते

मार्ग के अंत की चिंता ख़त्म हो जाए,

जब किसी गंतव्य तक पहुंचने की बेचैनी न रहे,

जब कहीं पहुंचना है इसलिए न चलना पड़े

बल्कि चलने में ही आनंद आने लगे,

तब समझ लेना आप सिर्फ़ चल नहीं रहे हैं

बल्कि जी रहे हैं अपने सफ़र को, अपनी मंजिल को,

और तब आप पाएंगे कि सफ़र और गंतव्य में

कोई अन्तर शेष नहीं रहा।


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तुम किसी से मिलना तो

किसी से मिलो तो ऐसे मिलना की जैसे पहली बार नहीं तीसरी – चौथी बार मिल रहे हो, ऐसे मिलना की उसे लगे कि हम क्या सच में पहली बार ही मिल रहे हैं!...