तुम अपने हुए तो शहर अजनबी हो गया..
अब, ना तुम अपने हो ना शहर अपना है..
उस मोड़ से शुरू करनी है फिर से ज़िंदगी ,
जहां सारा शहर अपना था और तुम अजनबी थे …
🖊️आशुतोष राणा
खुद की खोज : बाह्या जगत से अंतर्जगत की यात्रा हम क्या है? क्यों हैं? ऐसे तमाम प्रश्नों पर कुछ शब्द! स्वागत है आपका विचारों की दुनिया में..
किसी से मिलो तो ऐसे मिलना की जैसे पहली बार नहीं तीसरी – चौथी बार मिल रहे हो, ऐसे मिलना की उसे लगे कि हम क्या सच में पहली बार ही मिल रहे हैं!...
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