कुछ बातों को हम कभी नहीं समझ पाते,
उनका घटना हमें परेशान करता है , व्याकुल करता है,
हम बार – बार जूझते हैं, लड़ते हैं,
टूटते हैं, बिखरते हैं, लहुलुहान होते है,
कभी उन बातों से तो कभी स्वयं से,
फिर भी हम उन्हें क्यों समझ नहीं पाते…….
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खुद की खोज : बाह्या जगत से अंतर्जगत की यात्रा हम क्या है? क्यों हैं? ऐसे तमाम प्रश्नों पर कुछ शब्द! स्वागत है आपका विचारों की दुनिया में..
किसी से मिलो तो ऐसे मिलना की जैसे पहली बार नहीं तीसरी – चौथी बार मिल रहे हो, ऐसे मिलना की उसे लगे कि हम क्या सच में पहली बार ही मिल रहे हैं!...
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