चुप रहना, शांत बैठना,
इस चिंता से मुक्त होकर
कि हम कुछ सोच रहे हैं
यह भी एक सुख है!
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खुद की खोज : बाह्या जगत से अंतर्जगत की यात्रा हम क्या है? क्यों हैं? ऐसे तमाम प्रश्नों पर कुछ शब्द! स्वागत है आपका विचारों की दुनिया में..
चुप रहना, शांत बैठना,
इस चिंता से मुक्त होकर
कि हम कुछ सोच रहे हैं
यह भी एक सुख है!
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किसी से मिलो तो ऐसे मिलना की जैसे पहली बार नहीं तीसरी – चौथी बार मिल रहे हो, ऐसे मिलना की उसे लगे कि हम क्या सच में पहली बार ही मिल रहे हैं!...
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