Saturday, January 25, 2025

"वो बैठा है"



 निर्जन वन में,

किसी पेड़ की छाव में,

बैठा है वो, नितांत अकेला ।

उसके चेहरे पर मंद सी मुस्कान है,

उस मुस्कान में एक सुकून सा है,

अजीब सी मनमोहकता है,

वह बिन वज़ह खींचती है अपनी ओर,

मैं खींचा चला जा रहा हूँ उस सुकून में ,

उस सुकून से उपजे एकान्त में ।

वो बैठा है निर्जन वन में किसी दरख़्त की छाव में,

एकदम अकेला अपने एकान्त में ।

***

दरख़्त– पेड़

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