कुत्ता भी कितना प्यारा प्राणी है ना! भगवान का बनाया हुआ एक नायाब जानवर जो वफ़ादारी में इंसानो से भी ज़्यादा साफ़ दिल और वफ़ादार है ।
अपने मालिक के आते ही तुरंत दौड़कर उसके इर्द- गिर्द मंडराने लगता है भले ही, उसका मालिक अभी पाँच मिनट पहले ही उससे मिलकर , उसे पुचकार कर गया हो, फिर भी वह निस्वार्थ भाव से उसी अगाध प्रेम भाव से उससे मिलता है। उसे इस बात से बिल्कुल भी फर्क़ नहीं पड़ता कि लोग, घर वाले या कोई बाहर से आया हुआ अतिथि क्या सोचेगा ;वह तो एक छोटे बच्चे की भाँति अपने माता- पिता से लिपट जाना चाहता एक निष्कपट, निश्चल प्रेम के बंधन में जो इस दुनिया और शायद उस दुनिया के परे है।
****

No comments:
Post a Comment